कविता
दैनिक 'डेली न्यूज़' के 'हमलोग' (दिनांक 28 जून, 2020, रविवार ) अंक में मेरी दो कविताएँ प्रकाशित हुई हैं । राजस्थान पत्रिका परिवार , जयपुर की ओर से यह दैनिक प्रकाशित होता है।
पहली कविता यह है ;
झूठ की फुनगी
अर्पण कुमार
चढ़कर झूठ और आडंबर की
फुनगी पर आख़िरकार
तुम कितने ऊँचे दिखना चाहते हो
कुछ भी कर लो
यूँ किसी नभ के
स्पर्श करने से तो रहे
नभचर बनने से तो रहे
सच का एक झोंका
गिरा देगा तुम्हें कभी भी
कठोर और सच्ची इस धरती पर
अगर रहे तुम कुछ ख़ुशकिस्मत
और नहीं आया
कोई झोंका देर तलक
ख़ैर मना सकते हो ऐसे में
कुछ पलों के लिए
मगर जब-कभी
टूटेगा समय का धैर्य
तुम धड़ाम से नीचे गिरोगे
इसी काली और सख्त मिट्टी पर
आख़िरकार क्यों करते हो
अपने क़द की इतनी परवाह
बात मान लो
और नीचे उतर आओ चुपचाप
घबराओ नहीं
हम तुम्हें बौना नहीं कहेंगे
और तुम्हारे गंजे सिर पर
तबला नहीं बजाएँगे।
......................
दैनिक 'डेली न्यूज़' के 'हमलोग' (दिनांक 28 जून, 2020, रविवार ) अंक में मेरी दो कविताएँ प्रकाशित हुई हैं । राजस्थान पत्रिका परिवार , जयपुर की ओर से यह दैनिक प्रकाशित होता है।
पहली कविता यह है ;
झूठ की फुनगी
अर्पण कुमार
चढ़कर झूठ और आडंबर की
फुनगी पर आख़िरकार
तुम कितने ऊँचे दिखना चाहते हो
कुछ भी कर लो
यूँ किसी नभ के
स्पर्श करने से तो रहे
नभचर बनने से तो रहे
सच का एक झोंका
गिरा देगा तुम्हें कभी भी
कठोर और सच्ची इस धरती पर
अगर रहे तुम कुछ ख़ुशकिस्मत
और नहीं आया
कोई झोंका देर तलक
ख़ैर मना सकते हो ऐसे में
कुछ पलों के लिए
मगर जब-कभी
टूटेगा समय का धैर्य
तुम धड़ाम से नीचे गिरोगे
इसी काली और सख्त मिट्टी पर
आख़िरकार क्यों करते हो
अपने क़द की इतनी परवाह
बात मान लो
और नीचे उतर आओ चुपचाप
घबराओ नहीं
हम तुम्हें बौना नहीं कहेंगे
और तुम्हारे गंजे सिर पर
तबला नहीं बजाएँगे।
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