कविता
काव्योत्सव
अर्पण कुमार
लापरवाही से बताया
नदी ने
अपना जन्मदिन
उस दिन
चलताऊ अन्दाज़ में
मैंने मुबारक़बाद दिया उसे
फिर यह
क्योंकर हुआ
कि नदी का जन्मदिन
मेरा काव्योत्सव बन गया ।
(वर्ष 2002 में प्रकाशित अर्पण कुमार के पहले कविता-संग्रह 'नदी के पार नदी' से साभार)
कविता-पोस्टर
No comments:
Post a Comment