dunia aas paas
Wednesday, June 24, 2020
कविता
गुणसूत्र
अर्पण कुमार
जो खोट मेरे पुरखों में रहे
वे ही खोट
कमोबेश मुझमें भी हैं
नहीं कर रहा मैं
किसी का चरित्र हनन
बता रहा हूँ बस अपना चरित्र।
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