dunia aas paas
Tuesday, June 30, 2020
कविता
मेरे साथ नदी
मेरे कमरे में आई
और बाक़ी छुटभैये सामानों समेत
लील गई
मेरे बिखरे पन्नों के ढेर को भी
अपनी तेज़ धार में
मेरा इतिहास
नदी
नए सिरे से
लिखना चाहती है ।
( कविता-संग्रह 'नदी के पार नदी' में अर्पण कुमार )
कविता-पोस्टर
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