dunia aas paas
Friday, June 26, 2020
'खूँटी'
अर्पण कुमार
मुझे ज़रूरत थी
एक खूँटी की
टाँग सकता था जिस पर
स्वप्न, यौवन, मुखौटा,
और दर्द भी अपना
मैंने पार की
दीवारें कई
मगर
सपाट थीं सभी
नहीं मिलनी थी
नहीं मिली
कोई खूँटी कहीं।
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